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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में ईरान समर्थन और पश्चिम एशिया युद्ध पर जोरदार विरोध-प्रदर्शन

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जम्मू: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले एक तेज़ और नाटकीय राजनीतिक प्रदर्शन देखने को मिला। नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) और पीडीपी (PDP) के विधायकों ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के खिलाफ विधानसभा के अंदर और बाहर सशक्त विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान विधायकों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पोस्टर लहराए और नारेबाजी करते हुए अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने सदन के वेल में प्रवेश किया और 'इजराइल मुर्दाबाद' तथा अमेरिका के खिलाफ नारे लगाना शुरू कर दिया। इस विरोध का नेतृत्व नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता तनवीर सादिक ने किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी और जम्मू-कश्मीर सरकार ईरान के साथ खड़ी है और अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोर अन्याय और हमला माना जाता है।
तनवीर सादिक ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हम ईरान के साथ एकजुटता में खड़े हैं। हमारी पार्टी और सरकार पूरी तरह उनके साथ हैं। किसी भी देश को दूसरे देश पर हमला करने का कोई अधिकार नहीं है। हम ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं और चाहते हैं कि भारत की उच्चतम नेतृत्व भी इस घटना की निंदा करे।" उन्होंने यह भी कहा कि यह जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी प्रकार की हिंसा और अवैध हत्या की आलोचना हो।
विधायकों ने न सिर्फ सदन के भीतर बल्कि विधानसभा के बाहर भी प्रदर्शन किया। उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर के पोस्टर के साथ नारेबाजी की और दुनिया को संदेश दिया कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन होना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान कई विधायकों ने ईरान के प्रति संवेदनाएं जताते हुए कहा कि किसी भी देश के नागरिकों को अपनी सरकार चुनने और सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए।
इस विरोध-प्रदर्शन के चलते सदन की कार्यवाही करीब 30 मिनट तक बाधित रही। अधिकारी और कर्मचारी सदन में शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन विधायकों की एकजुटता और जोरदार नारेबाजी ने इस समय अवधि को लंबा कर दिया।
तनवीर सादिक ने कहा कि जैसा कि 7 मार्च को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पश्चिम एशिया में हो रहे संघर्ष की निंदा की थी, उसी तरह आज विधानसभा में सभी विधायकों ने यह स्पष्ट किया कि हवाई बमबारी या किसी भी प्रकार का बल प्रयोग शासन में बदलाव का साधन नहीं हो सकता। उमर अब्दुल्ला ने उस समय कहा था कि अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और शक्ति का दुरुपयोग है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी देश के नागरिकों को अपनी सरकार चुनने का अधिकार होना चाहिए और किसी भी बाहरी शक्ति को उस प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का हक नहीं है।
सदन में मौजूद विधायकों ने यह भी कहा कि युद्ध और हिंसा के कारण आम जनता को आर्थिक और सामाजिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह ऐसी घटनाओं पर ध्यान दे और हिंसा को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर रोक लगाए। प्रदर्शन में शामिल विधायकों ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार को इस मामले में अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया देना चाहिए, ताकि देश में और आसपास के क्षेत्रों में कोई गलत संदेश न जाए।
विरोध-प्रदर्शन में शामिल पीडीपी और JKNC के विधायकों ने विधानसभा परिसर के बाहर भी नारेबाजी और पोस्टर लहराए। उन्होंने कहा कि यह कदम ईरान के लोगों के प्रति समर्थन और अंतरराष्ट्रीय न्याय के पक्ष में उठाया गया है। कुछ विधायकों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह प्रदर्शन केवल शांति और कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए है।
विधानसभा के अधिकारियों ने इस प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए। पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने सदन के आसपास की स्थिति पर नजर रखी और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने की कोशिश की। अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन यह संकेत देता है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का प्रभाव भारत और जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक माहौल पर भी पड़ रहा है।
विधायकों ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंसा और हत्या को सामान्य मानने की प्रवृत्ति को रोकना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी देश के नागरिकों के मानवाधिकार सुरक्षित रहें।
इस प्रदर्शन के बाद, विधानसभा में कार्यवाही शुरू हुई और विधायकों ने बैठकर अपने एजेंडा पर चर्चा करना शुरू किया। हालांकि प्रदर्शन ने यह दिखा दिया कि राजनीतिक दल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी संवेदनशील हैं और ऐसे मामलों में एकजुटता दिखा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन केवल स्थानीय राजनीतिक नारेबाजी नहीं था, बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर प्रतिक्रिया और भारत में राजनैतिक दबाव भी शामिल था। यह घटना यह दिखाती है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा के विधायकों के लिए अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और स्थानीय राजनीतिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
समाप्त होने के बाद, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के विधायकों ने मीडिया से कहा कि वे ईरान और अन्य प्रभावित देशों के नागरिकों के साथ खड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के शीर्ष नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की निंदा करनी चाहिए और हिंसा पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट कदम उठाने चाहिए।

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